Health Dialogue
Jan-March. 2018
जनहित में नहीं है मैडिकल कमीशन बिल
एक ओर तो वर्तमान एमसीआई में भ्रष्टाचार का प्रमुख स्त्रोत 1990 के बाद से भारत में मैडिकल शिक्षा के तेजी से निजीकरण के साथ जुड़ा हुआ है, इस बिल के प्रस्ताव को निजीकरण को और प्रोत्साहन देने वाले ही हैं। 1980 में देशभर में 100 सरकारी तथा कुल 12 निजी मैडिकल कॉलेज थे, जिनमें क्रमशः 16570 तथा 1770 अंडर ग्रेजुएट सीटें थीं। 2016 तक आते-आते यह अनुपात लगभग पूरी तरह से पलट चुका था और जहां 205 सरकारी मैडिकल कॉलेजों में 27490 अंडर ग्रेजुएट सीटें थीं, 221 निजी मैडिकल कॉलेजों में 24690 अंडर ग्रेजुएट सीटें थीं। मैडिकल शिक्षा पर सरकारी खर्च में भारी बढ़ोतरी किए जाने की सिफारिश करने के बजाए, एनएमसी विधेयक नियमनकारी कदमों में ही ढील देने का प्रस्ताव करता है जो यह सुनिश्चित करते हैं कि मैडिकल कॉलेज इन अधिसूचित मानकों का पालन करें। इसमें मुख्यतः लाभ मिलेगा निजी मैडिकल कॉलेजों को, जिनमें से अनेक का तो भ्रष्ट तौर-तरीके अपनाने का पुराना इतिहास रहा है।
अमित सेनगुप्ता
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