जन स्वास्थ्य अभियान द्वारा चर्चा के लिए प्रस्ताव
हमारा स्वास्थ्य, हमारी आवाज़, हमारा अधिकार !
स्वास्थ्य अधिकार और सर्वजन स्वास्थ्य व्यवस्था (Universal Health Care) के लिए राष्ट्रीय अभियान (2026-27)
1 अभियान की भूमिका
आज पूरे भारत में बढ़ते अभाव, अस्थिरता और असमानता के कारण हमारा समाज और व्यवस्थाएं टूट रही हैं। डिजिटल शतों, प्रशासनिक बाधाओ, सरकारी बजेट कटौती की नीतियों, और बढ़ते निजीकरण के कारण जनता के बड़े हिस्से को कल्याणकारी योजनाओं, और यहां तक कि बुनियादी सार्वजनिक सेवाओं से बाहर धकेला जा रहा है। सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है, चीमा-आधारित योजनाएं वास्तविक सुरक्षा देने में विफल हो रही हैं, और करोड़ों लोग बुनियादी, सस्ती और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवा पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। देश भर में समुदायों को अधिकारों से वंचित होने, भेदभाव और उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है, और अब इन सभी अनुभवों को एक व्यापक और सामूहिक प्रतिक्रिया के रूप में एक साथ लाने की आवश्यकता है।
जन स्वास्थ्य अभियान (JSA) एक स्पष्ट सिद्धांत का दृढ़ता से दावा करता हैः स्वास्थ्य सेवाओं में सभी को शामिल किया जाना चाहिए, और किसी को भी स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए, क्योंकि यह हमारा बुनियादी अधिकार है। निजीकरण, बहिष्कार और कॉर्पोरेट संचालित स्वास्थ्य सेवा का विरोध करने के साथ-साथ, हमें सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने और व्यावहारिक स्थानीय समाधानों को आगे बढ़ाने के लिए समुदायों, फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, ग्राम पंचायतों और स्थानीय लोकतांत्रिक संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है।
JSA के नेतृत्व में प्रस्तावित यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान, JSA द्वारा दिसंबर 2025 में दिल्ली में आयोजित और सफल रहे 'राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकार अधिवेशन' की नींव पर खड़ा होगा। यह अभियान निम्नलिखित पांच परस्पर जुड़े हुए प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेगा:
स्वास्थ्य की स्थितियां (Health Situations): लोगों से सीधे बात करना और स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित होने, बहिष्कार और भेदभाव, इलाज के बढ़ते खर्च, स्वास्थ्य से जुड़ी बाधाओं और स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति की वास्तविकताओं का दस्तावेजीकरण करना।
स्वास्थ्य एकजुटता (Health Solidarities): इस साझा सिद्धांत के आधार पर कि स्वास्थ्य सेवाएँ बिना किसी बाधा के सभी को मिलनी चाहिए विभिन्न सामाजिक समूहों और आआंदोलनों के बीच एकता बनाना।
स्वास्थ्य सुधार के उपाय (Health Solutions): सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर लोगों का अधिकार स्थापित करते हुए, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बेहतर बनाने के लिए व्यावहारिक, जन-केंद्रित और स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित सुधार के रास्ते खोजना।
स्वास्थ्य व्यवस्था (Health Systems): सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), स्वास्थ्य बीमा योजनाओं और कॉर्पोरेट मॉडलों को चुनौती देते हुए, सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की रक्षा करना, उसका विस्तार करना, और उसे अधिक जनवादी बनाना।
*स्वास्थ्य संघर्ष (Health Struggles):
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अनुभव , गैर बराबरी, निजीकरण और व्यवसायीकरण के खिलाफ विभिन्न स्तरों पर चल रहे संघर्षों को मजबूत करना।
2. स्वास्थ्य आंदोलन का अगला चरण : संघर्ष और विकल्पों को जोड़ना
यह अभियान पूरे भारत में स्वास्थ्य आंदोलनों द्वारा पहले से किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा, साथ ही सामूहिक कार्रवाई के नए पहलुओं और रूपों को भी सामने लाएगा। इसका एक प्रमुख केंद्र व्यापक सामाजिक समूहों के साथ सक्रिय रूप से गठबंधन बनाना होगा। इनमें किसान और ग्रामीण समुदाय, संगठित और असंगठित मजदूर, दलित और आदिवासी आंदोलन, महिला संगठन और कई अन्य शामिल होंगे, जिसके माध्यम से स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय के इर्द-गिर्द साझा एजेंडा, मांगें और संघर्ष विकसित किए जाएंगे।
अभियान का दूसरा मुख्य उद्देश्य सभी स्तरों पर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के संगठनों के साथ आशा (ASHA) और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं से लेकर नसों, डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों तक मजबूत और स्थायी संयुक्त मोर्चे बनाना होगा। इसमें स्वास्थ्य बजट बढ़ाने, काम करने की बेहतर स्थिति और निजीकरण के विरोध जैसी साझा मांगों पर जोर दिया जाएगा। यह अभियान व्यावहारिक और स्थानीय स्तर पर जुड़े स्वास्थ्य देखभाल समाधानों को विकसित करने पर भी अधिक जोर देगा, साथ ही जमीनी स्तर से सहयोगात्मक प्रयासों को बढ़ावा देगा जैसे कि 'हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स' को मजबूत करने के लिए सामुदायिक पहल और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए विभिन्न प्रकार की 'जन-सार्वजनिक भागीदारी'। हमारा दृष्टिकोण समुदायों पंचायतों, फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं और स्थानीय स्वास्थ्य संस्थानों को शामिल करते हुए सकारात्मक सामाजिक कार्रवाई के माध्यम से सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर सक्रिय रूप से फिर से दावा करना और उनका पुनर्निर्माण करना है।
इसका एक और आयाम सच्चे गैर-लाभकारी (not-for-profit) और धर्मार्थ स्वास्थ्य संस्थाओं के साथ जुड़ना है, और साव ही ऐसी संस्थाओं को बढ़ते व्यवसायीकरण का विरोध करने में समर्थन देना है। इसके साथ ही, यह अभियान स्वास्थ्य सेवा के कारपोरेटीकरण और व्यवसायीकरण, जिसमें बीमा-संचालित मॉडल भी शामिल हैं, को सीधे चुनौती देगा, जो बहुसंख्यक भारतीय लोगों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में विफल रहे हैं। हम दृढ़ता से यह मानते हैं कि भारत में मौजूदा स्वास्थ्य प्रणाली 140 करोड़ लोगों के लिए स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करने का कोई व्यावहारिक मार्ग नहीं देती है।
इसलिए, यह अभियान सामाजिक और राजनीतिक एजेंडे पर 'सर्वजन स्वास्थ्य व्यवस्था' (Universal Health Care के विकल्प को मजबूती से रखेगा। इसे एक सार्वजनिक रूप से आयोजित और सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित प्रणाली के रू में समझा जाएगा, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े विस्तार और सुदृढ़ीकरण के माध्यम से सभी के लिए मुफ्न गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल की गारंटी देगी। साथ ही इसमें कमियों को पूरा करने के लिए विनियमित, गैर-लाभकारी अ गैर-कॉर्पोरेट प्रदाताओं को भी शामिल किया जाएगा। सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल आज स्वास्थ्य सेवा को एक बाजार वस्तु (जो आज बहुसंख्यकों के लिए पहुंच से बाहर है) के बजाय सभी के लिए एक 'सामाजिक अधिकार' बनाने की दिशा एक व्यावहारिक और न्यायसंगत मार्ग प्रदान करती है।
3. अभियान के मुख्य उद्देश्य
जनता के बीच बैठक, संवाद कार्यक्रम और जन शिक्षा सामग्री के माध्यम से जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं, द्वारा फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मचारियों और संबंधित लोगों के बीच गंभीर स्वास्थ्य नीति के मुद्दों, स्वास्थ्य अधिकारों JSA अभियान की मांगों के बारे में व्यापक जागरूकता पैदा करना।
*सभी प्रकार के जन आन्दोलन और संगठन किसान आंदोलनों, दलित और आदिवासी आंदोलनों, ट्रेड यूनियनों, असंगठित क्षेत्र के श्रमिक संघों, महिला संगठनों, LGBTQI समूहों, स्वास्थ्य कार्यकर्ता संघों, वरिष्ठ नागरिक मंचों, मानसिक स्वास्थ्य और विकलांगता अधिकार समूहों, खाद्य सुरक्षा अभियान, पर्यावरण न्याय आंदोलनों और अन्य जमीनी संगठनों को स्वास्थ्य के मुद्दों पर सक्रिय रूप से शामिल करना। गठबंधनों का विस्तार और गहरा करना, ताकि JSA के साथ एक व्यापक और समावेशी स्वास्थ्य अधिकार एजेंडा बुना जा सके।
*मांगों का एक साझा मंच तैयार करना जिसका समापन एक नया और संशोधित 'पीपुल्स हेल्थ चार्टर' (जन स्वास्थ्य सनद) और 'दस-सूत्रीय स्वास्थ्य अधिकार घोषणापत्र' के जन समर्थन के रूप में होगा।
*पीपुल्स हेल्थ वॉच रिपोर्ट (PIIWR) के माध्यम से साक्ष्य जुटानाः भारत में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की स्थिति का आकलन करने के लिए एक संक्षिप्त सुविधा सर्वेक्षण और इन सुविधाओं के exit interview आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा गांव/समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य संवाद' आयोजित किए जाएंगे ताकि लोगों द्वारा सामना की जाने वाली आम स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा समस्याओं, स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच में बाधाओं, और पहुंच में सुधार तथा स्वास्थ्य अधिकार सुनिश्चित करने के तरीकों की पहचान की जा सके। सर्वेक्षणों, संवादों और विभिन्न डेटा स्रोतों से अन्य साक्ष्यों के संकलन से पीपुल्स हेल्थ वॉच रिपोर्ट' तैयार की जाएगी।
*ग्राम / सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकार निगरानी समूहों (SANS) के माध्यम से अधिक भागीदारी और जवाबदेही सुनिश्चित करनाः संवादों की प्रक्रिया के माध्यम से, स्वास्थ्य प्रणाली की अधिक जवाबदेही और निर्णय लेने की प्रक्रिया में लोगों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक 'स्वास्थ्य अधिकार निगरानी समूह' का गठन किया जाएगा।
*जन लामबंदी और भागीदारी को बढ़ावा देनाः PHWR के माध्यम से उत्पन्न साक्ष्यों को एक जन अभियान के माध्यम से लोगों तक ले जाया जाएगा। इसके पूरक के रूप में 100-150 जिलों में स्वास्थ्य के अधिकार पर एक विशाल हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा, जिसमें 5-10 लाख सार्वजनिक हस्ताक्षर एकत्र किए जाएंगे, सैकड़ों जमीनी संगठनों की भागीदारी होगी और विविध आंदोलनों और समूहों के हजारों कार्यकर्ताओं को जोड़ा जाएगा।
*देश भर के लगभग 20 राज्यों को शामिल करते हुए, चरणों में एक राष्ट्रीय 'स्वास्थ्य अधिकार यात्रा' प्रक्रिया आयोजित करना और प्रत्येक राज्य में सार्वजनिक संवादों की एक श्रृंखला आयोजित करना। यह यात्रा लगभग छह महीने की अवधि में विभिन्न चरणों में राज्यों के समूहों को कवर करेगी। इसका उद्देश्य बड़े राज्यों में 5-10 जिलों और छोटे राज्यों में कुछ जिलों को कवर करते हुए देश भर के 100 से अधिक जिलों तक पहुंचना होगा।
*प्रमुख मांगों को व्यापक रूप से लोकप्रिय बनानाः स्वास्थ्य देखभाल के अधिकार का कानून, सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय को जीडीपी के 3.5% तक बढ़ाना, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को फिर से स्थापित करना और सुधारना, मुफ्त दवाएं और जांच, स्वास्थ्य कर्मचारियों के अधिकार, निजीकरण और विनाशकारी PPPs को समाप्त करना, मरीजों के अधिकारों के साथ निजी स्वास्थ्य सेवा का नियमन, स्वास्थ्य व्यवस्था में लैंगिक और सामाजिक न्याय, और एक सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की ओर बढ़ना।
*जन पैरवी और स्वास्थ्य को राजनैतिक एजेंडा बनाना (Policy Advocacy): राज्य-स्तरीय प्रस्तुतियाँ, मीडिया वकालत और मार्च 2027 में संसद के बजट सत्र के साथ सरेखित एक राष्ट्रीय 'जन स्वास्थ्य संसद' के माध्यम से जवाबदेही तय करना। विपक्षी दलों के सांसदों को स्वास्थ्य के अधिकार को अपने एजेंडे में केंद्रीय रूप से रखने के लिए आमंत्रित करना और संसद में एक निजी सदस्य विधेयक के रूप में स्वास्थ्य अधिकार विधेयक पेश करने का प्रयास करना।
4. अभियान और स्वास्थ्य अधिकार यात्रा के चरण
यह अभियान एक चरणबद्ध 'यात्रा' मोड में चलेगा, जिसमें भारत भर के करीब 100-150 जिलों तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए, राज्यों में सार्वजनिक संवादों की एक श्रृंखला आयोजित की जाएगी। पूरे अभियान की अवधि लगभग सितंबर 2026 से मार्च 2027 तक होगी। यह एक निरंतर राष्ट्रीय यात्रा के बजाय, क्षेत्रीय और राज्य स्तरीय चरणों के माध्यम से आगे बढ़ेगा। राष्ट्रीय और क्षेत्रीय टीमें प्रत्येक राज्य में जिला और शहर-स्तरीय कार्यक्रमों में भाग लेंगी।
चरण 1: प्रारंभिक चरण (जून-अगस्त 2026): यह चरण गठबंधन को व्यापक बनाने और समान विचारधारा वाले जन आंदोलनों, स्वास्थ्य कार्यकर्ता यूनियनों, ट्रेड यूनियनों, राजनीतिक दलों, सामाजिक समूहों और जन प्रतिनिधियों के साथ संवाद करने पर केंद्रित होगा। इस अवधि के दौरान, स्वयंसेवकों को सुविधा मूल्यांकन और सामुदायिक स्वास्थ्य संवाद आयोजित करने के लिए प्रशिक्षित भी किया जाएगा।
चरण 2: पीपुल्स हेल्थ वॉच रिपोर्ट की तैयारी (अगस्त-अक्टूबर 2026): गतिविधि का पहला दौर, जहां भी संभव हो, पीपुल्स हेल्थ वॉच रिपोर्ट (PHWR) की सहभागी तैयारी होगा। इसमें सुविधा मूल्यांकन, सामुदायिक स्वास्थ्य संवाद और अन्य सर्वेक्षणों के साक्ष्य के माध्यम से गांव या शहरी समुदाय स्तर पर स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में जानकारी एकत्र करना शामिल होगा।
एक संक्षिप्त सुविधा सर्वेक्षण के लिए निकटतम प्राथमिक देखभाल सुविधा (जैसे PHC, HWC या SC) की पहचान की जाएगी। सर्वेक्षण सेवाओं, मानव संसाधनों, दवाओं, परीक्षणों और बुनियादी ढांचे की उपलब्धता को रिकॉर्ड करने के लिए एक सरल मोबाइल-आधारित फॉर्म का उपयोग करेगा। यह VHSNC, जन आरोग्य समितियों और रोगी कल्याण समितियों के कामकाज का भी आकलन करेगा।
इसके बाद सुविधा में देखभाल लेने वाले लगभग 10 लोगों के साथ exit interviews या समुदाय-आधारित साक्षात्कार आयोजित किए जाएंगे, यह आकलन करने के लिए कि क्या उन्हें आबश्यक सेवाएं मिलीं और उन्होंने देखभाल की गुणवत्ता को कैसे महसूस किया।
ग्राम/सामुदायिक स्वास्थ्य संवादः ये संवाद लोगों द्वारा सामना की जाने वाली आम स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा समस्याओं, स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंचने में बाधाओं, और पहुंच में सुधार पर केंद्रित होंगे। संवादों के व्यापक विषय होंगे: सामान्य स्वास्थ्य समस्याएं, पहुंच में बाधाएं, जलवायु और पर्यावरण संबंधी चुनौतियां, और संघर्षों के अनुभव। उत्पन्न सभी साक्ष्यों को राज्य-विशिष्ट और राष्ट्रीय PHWR विकसित करने के लिए संकलित किया जाएगा।
चरण 3: यात्रा चरण (अक्टूबर 2026 से फरवरी 2027): तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण चरण प्रत्येक राज्य में जिला / स्थानीय स्वास्थ्य अधिकार कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित करना है, जो 'यात्रा' मोड में आयोजित किए जाएंगे। स्थान लचीले होंगे और उनमें जिले, कस्बे, शहर या सक्रिय तालुका शामिल हो सकते
हैं। प्रत्येक राज्य 15-20 दिनों से एक महीने की अवधि में कम से कम 5 से 10 ऐसे स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित कर सकता है। JSA की क्षेत्रीय और राष्ट्रीय टीमों के सदस्य निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए यात्रा में भाग लेंगे।
एक दिवसीय कार्यक्रमः इसमें जन स्वास्थ्य संवाद, सर्वेक्षण के निष्कर्षों की प्रस्तुति, रोगियों के अनुभव, स्वास्थ्य डेटा की प्रस्तुति, सांसदों और विधायकों के साथ बातचीत, सार्वजनिक अस्पतालों का दौरा, प्रेस कॉन्फ्रेंस और हस्ताक्षर अभियान शामिल हो सकते हैं।
हस्ताक्षर अभियान का लक्ष्यः कुल 5-10 लाख हस्ताक्षर लक्षित करते हुए, प्रति जिले में लगभग 5,000 हस्ताक्षर या उससे अधिक एकत्र करना। यदि अभियान दस लाख हस्ताक्षरों तक पहुंचता है, तो सकता है।
इसे "डेढ़ अरब लोगों के लिए स्वास्थ्य के अधिकार पर दस लाख हस्ताक्षर" के रूप में प्रचारित किया जा
चरण 4: राज्य-स्तरीय स्वास्थ्य सभाएं और राष्ट्रीय एकत्रीकरण (जनवरी-मार्च 2027): अंतिम चरण में राज्य स्तरीय स्वास्थ्य सभाएं शामिल होंगी, जिसके दौरान विधायकों, राजनीतिक दलों, सामाजिक आंदोलनों और मीडिया के साथ अनुभवों, निष्कषों और मांगों को साझा किया जाएगा। इसके बाद मार्च के अंत या अप्रैल 2027 की शुरुआत में दिल्ली में 'जन स्वास्थ्य संसद' के लिए देशव्यापी लामबंदी होगी।
5. अभियान की प्रमुख मांगें (दस-सूत्रीय मांगपत्र)
यह अभियान JSA के स्वास्थ्य अधिकार एजेंडे के आधार पर कुछ प्रमुख नीतिगत प्रस्तावों का प्रचार करेगा:
1. स्वास्थ्य सेवाओं को बुनियादी अधिकार बनाना - केंद्र और राज्य स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को कानूनी
अधिकार बनाया जाए। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया जाए।
सभी लोगों के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की गारंटी दी जाए।
2. सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खर्च में बड़ी बढ़ोत्तरी
2027 के केंद्रीय बजट में देश के स्वास्थ्य बजट को दोगुना किया जाए, राज्यों के स्वास्थ्य बजट बढ़ाए जाएँ, और अगले तीन वर्षों में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय को GDP के 3.5 प्रतिशत तक पहुँचाया जाए। राज्यों को स्वास्थ्य बजट बढ़ाने में सहायता के लिए वित्त आयोग विशेष व्यवस्था करे।
3. सभी स्वास्थ्य कर्मियों को न्याय
आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं सहित, सभी अस्थायी स्वास्थ्य कर्मियों को उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा के साथ नियमित किया जाए। सभी रिक्त पद भरे जाएँ, और दूर-दराज़ ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शी नीतियाँ लागू की जाएँ।
4. सभी स्तरों पर मुफ्त दवाइयाँ और जाँच, जनहित में बनायी जाए दवा नीति
तमिलनाडु के TNMSC मॉडल के आधार पर, सभी सार्वजनिक अस्पतालों और स्वास्थ्य केन्द्रों में आवश्यक दवाओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। सभी आवश्यक दवाओं को मूल्य नियंत्रण के दायरे में लाया जाए, अवैज्ञानिक दवाइयों पर रोक लगाई जाए, दवाओं पर GST हटाकर जेनेरिक दवाओं को बढ़ावा दिया जाए
और सार्वजनिक क्षेत्र की दवा कंपनियों को फिर से मजबूत किया जाए।
5. स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा के निजीकरण को रोकना
सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को कमजोर करने वाली सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) की व्यवस्था को खतम किया जाए। मौजूदा स्वास्थ्य बीमा योजनाओं को समाप्त करते हुए, सर्वजन स्वास्थ्य सेवा (UHC) की दिशा में कदम बढ़ाये जाएँ।
6. निजी स्वास्थ्य सेवाओं का नियमन
सभी राज्यों में क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट या समकक्ष कानून लागू किए जाएँ, ताकि इलाज के दर मानकों के अनुसार तय हों और पारदर्शक हों, मरीजों के अधिकारों के चार्टर का पालन सभी स्वास्थ्य संस्थानों में सुनिश्चित हो।
7. स्वास्थ्य व्यवस्था में लैंगिक न्याय
सभी महिलाओं और LGBTQI समुदायों के लिए सम्मानजनक, भेदभाव-मुक्त और बेहतर दर्जे की स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित की जाएँ, ताकि उनके स्वास्थ्य अधिकारों की रक्षा हो सके।
8. स्वास्थ्य सेवाओं में सभी प्रकार का भेदभाव और वंचना खतम करना
दलितों, आदिवासियों, मुसलमानों, धर्म या भाषा से सम्बंधित सभी अल्पसंख्यकों, प्रवासी समुदायों तथा अन्य वंचित समूहों के लिए सम्मानजनक, समान और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित की जाएँ। इसके लिए विशेष वित्तीय प्रावधान किए जाएँ, और सामाजिक तथा सांप्रदायिक बहिष्कार से पैदा हुई बाधाओं को दूर किया जाए।
9. सर्वजन स्वास्थ्य व्यवस्था (Universal Health Care) की ओर बढ़ना
विफल साबित हो चुके बीमा आधारित PM-JAY मॉडल को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना, इसकी जगह सार्वजनिक रूप से संचालित सर्वजन स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित की जाए, जिसमें स्वास्थ्य सेवाएँ सभी लोगों के लिए पूरी तरह मुफ्त हों। सार्वजनिक व्यवस्था की कमियों को पूरा करने के लिए, इस व्यवस्था में उचित नियमन के साथ निजी स्वास्थ्य संस्थानों (विशेषकर धर्मार्थ, छोटे और व्यक्तिगत सेवा प्रदाताओं) को शामिल किया जाए।
10. स्वास्थ्य के सामाजिक और पर्यावरणीय निर्धारकों पर कार्यवाही करना
पोषण, पानी, स्वच्छता, आवास, रोजगार, जलवायु और पर्यावरण जैसी व्यापक परिस्थितियों पर ध्यान दिया जाए और इनमें बुनियादी सुधार हों, क्योंकि यह सभी करक लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।
जन स्वास्थ्य अभियान (JSA) ऐसी कुछ प्रमुख नीतिगत माँगों को व्यापक रूप से लोगों तक पहुँचाएगा, और उन पर लाख लोगों का समर्थन और हस्ताक्षर जुटाएगा।
6. अलग अलग सामाजिक वर्गों और समुदायों तक पहुंचने की पहल
इस अभियान का एक मुख्य उद्देश्य संयुक्त रूप से समर्थित स्वास्थ्य मांगों से संबंधित विभिन्न सामाजिक समूहों की भागीदारी का विस्तार करना होगा, उदाहरण के लिए:
किसान, खेतिहर मजदूर और ग्रामीण समुदायः इलाज के बड़े खचों के कारण कर्ज, कृषि संकट, किसानों क आत्महत्याएं, और ग्रामीण स्वास्थ्य प्रणाली को सुधारने की आवश्यकता।
अलग अलग प्रकार के मजदूर (असंगठित क्षेत्र सहित) और ट्रेड यूनियनः ESI, व्यावसायिक स्वास्थ्य, स्वास्थ्य सेवाओं पर मजदूरों का बढ़ता खर्च, शहरी स्वास्थ्य व्यवस्था और निजीकरण।
महिला संगठनः प्रजनन स्वास्थ्य (reproductive health) से जुड़े अधिकार, हिंसा से प्रभावित महिलाओं की देखभाल, एनीमिया और पोषण, मातृ स्वास्थ्य सेवाएं, HPV टीकाकरण आदि।
दलित अधिकार और जाति-विरोधी आंदोलनः स्वास्थ्य सेवा में जातिगत भेदभाव को समाप्त करना, सफाई कर्मचारियों का स्वास्थ्य, तथा दलित वंचित बस्तियों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच सुनिश्चित करना।
आदिवासी संगठनः दुर्गम स्वास्थ्य सेवा, कुपोषण, भेदभाव, विस्थापन का स्वास्थ्य पर प्रभाव, और स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य कार्यकर्ता के रूप में प्रशिक्षित करने की आवश्यकता।
LGBTQI समूहः ट्रांसजेंडर व्यक्ति संशोधन अधिनियम 2026 का जोरदार विरोध, सम्मानजनक और जेंडर-संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाएं, मानसिक स्वास्थ्य और परामर्श सेवाएँ, स्वास्थ्य संस्थानों में भेदभाव समाप्त करना।
बाल स्वास्थ्य और पोषणः कुपोषण और एनीमिया, ICDS और स्कूल पोषण कार्यक्रमों की कमजोर होती व्यवस्था, बच्चों की बीमारियों पर लोगों का बढ़ता खर्च, बाल एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना तथा सभी बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करना।
मानसिक स्वास्थ्य समूहः सस्ती और समुदाय आधारित मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना, हिंसा और सामाजिक बहिष्कार से जुड़ी मानसिक परेशानियों पर ध्यान देना, परामर्श और सहायता सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाना, बाजारी प्रभाव और भेदभाव वाले मानसिक स्वास्थ्य मॉडलों के विकल्प विकसित करना।
HIV/AIDS नेटवर्कः मुफ्त इलाज और जाँच सेवाओं की रक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं में भेदभाव खतम करना तथा HIV/AIDS से प्रभावित लोगों के अधिकारों की रक्षा।
वुजुर्ग और वरिष्ठ नागरिक समूहः
दीर्घकालिक बीमारियों के लिए सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ, दवाइयों और जाँच की उपलब्धता, बुजुर्गों की देखभाल और प्रशामक (Palliative) सेवाओं को मजबूत करना तथा डिजिटलीकरण और कमजोर होती सार्वजनिक सेवाओं के कारण होने वाले बहिष्कार से सुरक्षा।
विकलांग जनों के अधिकार समूहः
सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में रैंप (Ramp) और अन्य आवश्यक सुविधाओं सहित भौतिक पहुँच सुनिश्चित करना, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को सुलभ रूपों में उपलब्ध कराना, व्हीलचेयर, कृत्रिम अंग और अन्य सहायक उपकरणों का निःशुल्क वितरण तथा विकलांगता का प्रमाण पात्र देने की प्रक्रिया को सरल और विकेन्द्रीकृत बनाना।
पर्यावरण न्याय और जमीनी पर्यावरण आंदोलनः
औद्योगिक प्रदूषण, दूषित पानी, जहरीले कचरे और वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को चुनौती देना, बढ़ते कैंसर, श्वसन रोगों और व्यावसायिक बीमारियों पर ध्यान आकर्षित करना, तथा सुलभ सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की माँग करना।
7. व्यापक जनसंपर्क, संवाद और संदेशों का संचार
इस अभियान का एक बड़ा हिस्सा पूरे भारत में विविध वर्गों के लोगों तक संदेश पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर जनसंचार और जनसंपर्क होगा। अभियान के हर चरण में सोशल मीडिया रणनीतियां होंगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि साक्ष्यों, मांगों और स्वास्थ्य संघर्षों को व्यापक रूप से कवर किया जाए। संचार प्रयास सकारात्मक विकल्पों, स्थानीय समाधानों और लोगों की एकजुटता को उजागर करते हुए हस्ताक्षर अभियान को भी बढ़ावा देंगे।
यह संचार विभिन्न भाषाओं में प्रिंट सामग्री, सोशल मीडिया सामग्री, छोटे वीडियो और राज्य स्तरीय दस्तावेजीकरण पर आधारित होगा, ताकि संदेश युवा दर्शकों सहित सभी के लिए सुलभ हों। जहां भी संभव हो नुक्कड़ नाटक और कला जत्था जैसी सांस्कृतिक गतिविधियों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जाएगा। रचनात्मक संचार प्रयासों के माध्यम से, अभियान न केवल लाखों लोगों को शारीरिक रूप से लामबंद करेगा, बल्कि करोड़ों लोगों तक पहुंचकर स्वास्थ्य से जुड़ी सार्वजनिक चर्चा को नया आकार देगा।
8. अभियान के कुछ प्रमुख परिणाम
इस अभियान से निम्नलिखित महत्वपूर्ण परिणाम सामने आने की उम्मीद है:
संशोधित जन स्वास्थ्य घोषणापत्र (People's Health Charter):
यह जन स्वास्थ्य संसद में एक जीवंत दस्तावेज़ के रूप में जारी किया जाएगा, जिसमें यात्रा के दौरान जमीनी आंदोलनों से
सामने आये तमाम प्रस्तावों और सुझावों को शामिल किया जाएगा।
100-150 जिलों में स्वास्थ्य अधिकार कार्यक्रमः
स्थानीय संवादों के माध्यम से देशभर में लाखों लोगों तक पहुँचा जाएगा। साथ ही 100 से अधिक जिलों में जन स्वास्थ्य अभियान की जिला या शहर इकाइयों का गठन या सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।
स्वास्थ्य अधिकार माँगों पर लगभग दस लाख लोगों के हस्ताक्षरः
दस स्वास्थ्य अधिकार माँगों के समर्थन में और स्वास्थ्य को संविधान में मौलिक अधिकार बनाने की माँग के पक्ष में
लगभग दस लाख लोगों के हस्ताक्षर जुटाए जाएँगे।
जमीनी स्तर से जानकारी और अनुभवों का संग्रहः
स्थानीय सर्वेक्षण, संवाद और लोगों के अनुभवों से प्राप्त जानकारी को एक राष्ट्रीय रिपोर्ट के रूप में संकलित किया जाएगा।
जन स्वास्थ्य संसद (मार्च 2027):
संसद के सत्र के दौरान दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सभा में 5-10 लाख हस्ताक्षर और जन स्वास्थ्य घोषणापत्र सांसदों, राजनीतिक दलों और मीडिया के समक्ष प्रस्तुत किए जाएँगे।
जन प्रतिनिधियों के साथ मजबूत संवाद और नेटवर्क:
विशेष रूप से विपक्षी दलों के सांसदों और विधायकों के साथ ऐसे संबंध विकसित किए जाएँगे जो सार्वजनिक स्वास्थ्य और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हों।
राजनीतिक दृष्टिकोण और जन कल्याण की राजनीति
विपक्षी दलों और राज्य सरकारों के साथ प्रभावी संवाद के लिए अभियान का दृष्टिकोण केवल अधिकार-आधारित नहीं, बल्कि "राज्यों के अधिकार लोकतंत्र कल्याणकारी राज्य" (Federalism - Democracy - Welfare state) की अवधारणा पर आधारित होगा। यह अभियान अत्यधिक केंद्रीकृत और कॉर्पोरेट समर्थक स्वास्थ्य मॉडल के विरुद्ध भारतीय संविधान, राज्यों की स्वायत्तता और लोगों के कल्याण की रक्षा के अभियान के रूप में सामने आएगा।
आज केंद्र सरकार की स्वास्थ्य नीतियों को "लोगों के लिए नहीं, मुनाफे के लिए स्वास्थ्य सेवा" के मॉडल के रूप में देखा जा सकता है, जिसमें मरीजों को उपभोक्ता और सार्वजनिक धन को निजी कंपनियों के लिए सब्सिडी की तरह माना जाता है। इसके विपरीत, जन स्वास्थ्य अभियान एक वैकल्पिक दृष्टि प्रस्तुत करता है- "मुनाफे के लिए नहीं, लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवा।"
सामाजिक और धार्मिक विभाजनों के आज के दौर में, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वास्तव में एक ऐसी व्यवस्था है जो सभी लोगों को समान रूप से जोड़ सकती है। जन स्वास्थ्य अभियान (JSA) विपक्षी दलों को एक रचनात्मक और सबको शामिल करने वाला एजेंडा (जन कल्याण की राजनीति) प्रस्तुत करने में मदद कर सकता है, जो सांप्रदायिक और विभाजनकारी सोच (घृणा की राजनीति) का मुकाबला कर सकेगी।
यदि इस अभियान को व्यापक और संगठित तरीके से चलाया गया, तो यह वर्ष 2000 के बाद भारत का सबसे बड़ा स्वास्थ्य अधिकार लामबंदी की प्रक्रिया बन सकता है। यह स्वास्थ्य आंदोलनों और व्यापक लोकतांत्रिक संघर्षों के बीच एक मजबूत पुल का काम करेगा, कॉर्पोरेट-केंद्रित और व्यावसायिक स्वास्थ्य व्यवस्था का एक सशक्त विकल्प प्रस्तुत करेगा, और स्वास्थ्य अधिकार तथा सर्वजन स्वास्थ्य सेवा के लिए एक नई सामाजिक और राजनीतिक ऊर्जा का निर्माण करेगा।