Tuesday, 30 April 2019

JSA HARYANA


जन स्वास्थ्य अभियान हरयाणा
स्वास्थ्य एक अहम मुद्दा रहा है और अब और भी अहम स्थान लेता जा रहा है | समाज और व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए जरूरी कारकों मसलन साफ वातावरण , पौष्टिक भोजन , साफ़ पानी , हवादार आवास और रोजगार की तरफ ध्यान बहुत ही कम दिया जा रहा है |  इसके चलते जहाँ गैर संक्रामक मसलन हृदय रोग , डायबटीज, जैसी बीमारियों की बढ़त हुई है वहीँ संक्रामक बीमारियों की वापसी भी तेज हुई है |  हरयाणा आर्थिक क्षेत्र में विकसित होते हुए हुए और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कुछ मानकों में सुधार के बावजूद कुल मिलाकर सरकारी सुविधाओं के क्षेत्र में काफी पिछड़ता जा रहा है |  पायनीयर अख़बार में 15 दिसम्बर 2017 को स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे दिए आंकड़े चौकाने वाले हैं |
1 .71 .1 % ( 6 -59 )  महीनों के बीच के बच्चे खून की कमी के शिकार हैं| 
2 . (15 -49 ) साल के बीच की महिलाएं और लड़कियां खून की कमी की शिकार हैं |
3 . (15 -19 ) साल की किशोर लड़कियों में 62 . 7 % में खून की कमी है
|  इसी उम्र के 29 . 7 % लड़कों में खून की कमी पाई गई |
4 . ( 15 -19 ) साल की 36 . 6 % किशोरियां कुपोषण की शिकार हैं | इसी उम्र के 30.6 % लड़कों में कुपोषण है |
       इसी प्रकार हरियाणा स्वास्थ्य रक्षा सुविधाओं में 1966 से 2005 तक तो कुछ विस्तार हुआ मगर उसके बाद विकास बहुत धीमा है |  सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा चरमराता सा नजर रहा है |  जबकि कारपोरेट सैक्टर में स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण  तेजी से हो रहा  है | सरकार की नीतियों और आर्थिक मदद के चलते ही प्राइवेट सैक्टर फला फूला है|  इसके प्रोहत्साहन के बीमा योजना और एम्पेनलमेंट खास तरीके नजर आते हैं |  साथ ही पीपीपी मोड भी उभरता जा रहा है |   प्राइवेट मैडीकल कालेजों की बढ़त हो रही है |  सरकारी में एम बी बी एस की 600 सीटें हैं और प्राइवेट में 800 सीटें हैं | 60 --70 लाख खर्च हो जाता है |  फिर पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए 2 करोड़ से ज्यादा खर्च हो जाते हैं |
    हरियाणा की जनसंख्या (2011 )  2. 54 करोड़ के लगभग है | ग्रामीण जनसंख्या 16,509 ,359  है |  500 हजार पर एक उप स्वास्थ्य केंद्र , 30. 000 पर एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और एक लाख पर एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीण क्षेत्र का प्रारूप माना गया है |
जो अब स्वास्थ्य सुविधाओं का ढांचा है :
1 . उप स्वास्थ्य केंद्र ------------  2630
2. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र--------486
3. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र -----119
( 2015 --2016 के आंकड़ों पर आधारित )
जो स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा होना चाहिए ::::
 1.उप स्वास्थ्य केंद्र ------------   3301 
2. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र-------- 550 
3. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ----- 165
यदि 2018 की अनुमानित जनसंख्या पर सोचा जाये तो और भी ज्यादा ढांचा चाहिए | सरकारी ढांचे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर 1 सर्जन , 1 शिशु रोग विशेषज्ञ , 1 स्त्री रोग विशेषज्ञ और  1  फिजिसियन होना चाहिए | ये चारों स्पेस्लिस्ट शायद ही किसी सामुदायिक केंद्र में हों |बाकि डाक्टरों , नर्सों , रेडिओग्राफरों ,  एन एम और बाकि के पैरामैडीकल  स्टाफ की भी काफी कमी है |  दवाओं की कमी , लैब टेस्टों की कमी , एक्विमेंट्स की कमी आम बात हो गयी लगती है | इस प्रकार यदि प्राथमिक और सैकण्डरी स्तर की  स्वास्थ्य सेवाओं  के ढांचे का यह हाल है तो टर्सरी स्तर के पी जीआई एम  एस रोहतक और दूसरे मैडीकल  की हालत समझी जा सकती है |  
 इस उपलक्ष्य में निम्नलिखित प्रस्ताव रखे जाते हैं जो कि मौजूदा स्वास्थ्य परीस्थिति, जो कि पूर्णरुप से खारीज करने लायक है, को पलट सकें तथा स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियां तथा स्वास्थ्य सेवाएं लागू करते हुए सबके लिए स्वास्थ्य का सपना साकार कर सकें।
1        स्वास्थ्य के सामाजिक निर्णायकों पर ध्यान हो:: इसके  स्वास्थ्य सुरक्षा को बढ़ावा देना , लोक वितरण प्रणाली को सार्वभौमिक बनाना होगा जिसके तहत स्थानीय खाद्य पदार्थों को बढ़ावा दिया जाए। राष्ट्रीय शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण नीति बनाई जाए जिसके अंतर्गत आई सी डी एस का सार्वभौमिकीकरण हो तीन साल तक के बच्चों को पूर्ण रुप से शामिल करने हेतू सेवाओं तथा कार्यदल में विस्तार हो। समस्त गावों मोहल्लों में शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल की सार्वभौमिक उपलब्धता हो तथा हर गांव मोहल्ले में स्वच्छ शोचालयों तक सार्वभौमिक पहुंच हो।
2- स्वास्थ्य सम्बन्धित लैंगिक पहलूओं को सम्बोधित किया जाए -इसके अंर्तगत समस्त महिलाओं तथा समलैंगिक नागरिकों को समेकित , आसानी से उपलब्ध उच्चगुणवतापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच इसकी उपलब्धता की गाारण्टी दी जाए जो कि केवल मातृत्व सवास्थ्य सेवाओं तक ही सीमित हो। उन समस्त कानून ,नीतियों तथा आाचरणों को समाप्त किया जाए जो कि महिलाओं के प्रजनन, यौनिक तथा जनतांन्त्रिक अधिकारों का हनन करता है। जो भी विभिन्न प्रजनन प्रोद्योगिकियां जो कि महिलाओं के लिए हानिकारक हो सकती हैं उन्हें नियंत्रित किया जाए लिंग आाधारित उत्पीड़न को एक लोक स्वास्थ्य समस्या माना जाए तथा इसके तहत शारीरिक एवम मानसिक रुप से पीड़ितों को तमाम आवश्यक स्वास्थ्य जांच, दस्तावेजिकरण, रेफरल का अधिकार दिया जाए तथा समन्वित नैतिक चिकित्सीय कानूनी प्रक्रियाओं के लिए भी उन्हें अधिकृत बनाया जाए स्वास्थ्य सेवाओं को किषोर किषोरियों के लिए मित्ऱतापूर्ण बनाया जाए तथा इस तबके को भी समेकित, उच्चगुणवता पूर्ण , आासनी से पहुंचने लायक स्वास्थ्य सेवाएं सुनिष्चित हो जो कि उनके विषेश प्रजनन तथा यौनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करती हों।
3- समस्त जाति आधारित भेदभाव तुरंत समाप्त किया जाए- जाति आधारित भेदभावों को, जो कि बुरे स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण सामाजिक कारक है , पूर्णरुप से समाप्त करने हेतू त्वरित एवं प्रभावी कदम उठाये जाएं। मानव द्वारा मैला ढोने वाले समस्त मैनुअल कार्य पूर्ण रुप से प्रतिबन्धित हों। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में इस भेदभाव से पीड़ित तबकों को प्राथमिकता दी जाए इसके लिए स्वास्थ्य सेवाओं का पुर्नगठन किया जाए।
4- स्वास्थ्य सेवाओं के अधिकार को संवैधानिक बनाया जाए- देश में स्वास्थ्य के अधिकार का कानून लागू किया जाए जो कि समेकित, उच्चगुणवतापूर्ण, आसानी से उपलब्ध सेवाओं को सुनिष्चित करता हो तथा प्राथमिक, द्वितीय एवं तृतीय स्तरीय सेवायें आवष्यकतानुसार सबको उपलब्ध करता हो। सेवा प्रदाता को सेवाओं को उपलब्ध नहीं कराने या मना करने पर ;चाहे गुणवता,पहुंच या खर्च से जुड़े हुए कारणों से भी हो, उसे कानूनी अपराध घोषित किया जाए।
5- स्वास्थ्य के उपर सार्वजनिक व्यय को बढ़ाया जाए-सकल घरेलू उत्पाद के कम से कम 3-6 प्रतिशत को स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित किया जाए जो कि 2014 की स्थििति में प्रति व्यक्ति 3000 रुपये बनता है।
इस व्यय में कम से कम एक तिहाई केन्द्रिीय सरकार से राज्यों को उपलब्ध हो। हरियाणा सरकार का प्रति व्यक्ति खर्च 1786 है। एक मध्य सीमा के तहत स्वास्थ्य के उपर किये जाने वाले समस्त सार्वजनिक व्यय को सकल घरेलू उत्पाद के 5% तक बढ़ाया जाए।
6- स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता एवं गुणवता सुनिश्चित की जाए-समस्त स्वास्थ्य सुविधाओं में सेवाओं की गुणवता सुनिश्चित की जाए जिसके तहत स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी , सुरक्षित , गैर शोषणीय बनाये तथा लोगों को सम्मानपूर्वक सेवायें उपलब्ध हों। मरीजों के अधिकारों का आदर हो एवं मरीजों की आराम तथा संतुष्टि पर ध्यान दिया जाता हो। गुणवता का मानक केवल भौतिक या चिकित्सकीय संरचना पर आधारित हो जो कि प्रायः बड़े कार्पोरेट अस्पतालों या मैडीकल टूरिज्म को बढ़ावा देते हैं तथा कम खर्च में सही एवं प्रभावी सेवाओं के प्रदाय को बढ़ावा नहीं देता है। समस्त लोक सवास्थ्य संस्थान अपने स्तर पर गारन्टी की गई सभी स्वास्थ्य सेवाओं को प्रदान करने हेतू बाध्य हों समस्त लोक स्वास्थ्य सुविधाओं को किसी भी प्रकार के उपभोग्ता शुल्क से मुक्त किया जाए तथा सेवाएं शासन द्वारा संचालित सुविधाओं के माध्यम से उपलब्ध कराया जाए कि निजी सार्वजनिक सहयोग व्यवस्था से।
7- स्वास्थ्य सेवाओं का सक्रीय एवं निष्क्रिय निजीकरण बंद हो- सक्रीय निजीकरण के तरीके ; जैसे सार्वजनिक संसाधन या पूंजी को निजी संस्थानों को वाणिज्यिक हस्तानन्तरण करना , पूर्ण रुप से बंद करने हेतू आवश्यक कदम उठाया जाए। निष्क्रिय रुप से हो रहे निजीकरण को रोकने के लिए लोक सुविधाओं में निवेश बढ़ाया जाए। सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों से प्रदत सेवाएं केवल प्रजनन स्वास्थ्य,टीकाकरण एवं अन्य चुनिन्दा बीमारियों के नियन्त्रण पर सीमित होकर समेकित स्वास्थ्य सेवाओं पर आधारित हो।
8- स्वास्थ्य कार्यदल का बेहतर प्रशिक्षण होः स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत सभी कर्मचारियों की बेहतरीन शिक्षा एवं प्रशिक्षण के लिए सार्वजनिक निवेश को बढ़ाया जाए। सरकार द्वारा चलायी जा रही सभी शिक्षण संस्थान द्वारा उन जरुरत मंद इलाकों से चिकित्सकों, नर्सों तथा स्वास्थ्य कर्मचारियों को आवश्यक संख्या में चयनित कर शिक्षा प्रशिक्षण दिया जा रहा है यह सुनिश्चित किया जाए। प्रशिक्षण नीति में बदलाव लाया जाए जिससे कि स्वास्थ्य कार्यदल द्वारा स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करने हेतू समस्त जरुरी दक्षताएं दी जा सकें। चिकित्सा तथा संबन्धित क्षेत्र के उच्च शिक्षा व्यवस्था के वाणिज्यिकरण बंद हों तथा निजी शिक्षण संस्थाओं के व्यवस्थित नियन्त्रण हेतू प्रभावी एवं पारदर्शी तन्त्र लागू किया जाए।भारतीय चिकित्सा परिषद,भारतीय नर्सिंग परिषद जैसी संस्थाओं विनियामक संस्थाओं को गहन समीक्षा के पश्चात पुनर्गठित किया जाए जिससे कि वर्तमान भ्रष्ट एवं अनैतिक व्यवस्था को समाप्त किया जा सके।
9- बेहतर शासित पर्याप्त लोक स्वास्थ्य कार्यदल होः लोक स्वास्थ्य प्रणाली में समस्त सेवाओं के लिए आवश्यक सभी पद एवं स्थान प्रर्याप्त रुप से सृजित किया जाए एवं इन पदों को समय समय पर भरा जाये। संविदा में नियुक्त कर्मचारियों को नियमित किया जाए तथा आशाओं , बहुउद्येशीय कार्यकर्ताओं तथा अन्य लोक स्वास्थ्य तऩ्त्र के कर्मचारियों का प्रयाप्त रुप से क्षमतानिर्माण किया जाए एवं उन्हें अपने कार्य के लिए सही मानदेय किया जाए उपयुक्त काय्र करने का माहौल प्रदान किया जाए। कर्मचारियों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा पर ध्यान दिया जाएतािा इस हेतू महिला कर्मचारियों के लिए विशेष व्यवस्था बनाई जाए। उपलब्ध शोध से यह पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्र में डाक्टरों की कमी पेषेवर समस्याओं से ज्यादा प्रशासनिक कमजोरी तथा राजनैतिक पराजय के चलते है, जिसके सुधारने के लिए कार्य किया जाए हर स्तर के लिए ऐसे लोक स्वास्थ्य कैडर का गठन हो जिसमें प्रयाप्त संख्या में चिकित्सक, नर्सें तथा स्वास्थ्य कर्मियों का दल सम्मिलित हो जिसका जिसको प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में, लोक स्वास्थ्य के सम्बन्ध में एवं एक दल के रुप में बेहतर कार्य करने में प्रशिक्षण प्राप्त हो।
10- सभी आवष्यक दवाओं का एवं जांच सुविधाओं की मुफत एवं गुणवतापूर्ण उपलब्धता सुनिष्चित होः जिस प्रकार तामिलनाडू, केरल एवं राजस्थान राज्य में किया गया है वैसा स्वायत , पारदर्शी एवं आवश्यकता आाधारित दवा एवं अन्य सामग्रियों के खरीदी एवं वितरण प्रणाली गठित एवं लागू हो। लंबित बीमारियो के सभी मरीजों के लिए सभी आवष्यक दवाओं का पूरी अवधि के लिए उपलब्धता सुनिश्चित हो एवं दवा वितरण केन्द्रों को मरीजों के आसान पहुंच के मद्येनजर गठित किया जाये। समस्त स्वास्थ्य सुविधाओं में जेनेरिक दवाओं का प्रिस्क्रिप्सन एवं उपयोग को अनिवार्य करार दिया जाये।
11 - सामुदायिक सहभागिता, सहभागी योजना निर्माण एवं समुदाय आधारित निगरानी को बढ़ावा दिया जायेः स्वास्थ्य सेवायें जनता के प्रति जवाबदेह हों। इसके लिए समुदाय आधारित निगरानी एवं योजना निर्माण प्रक्रिया को समस्त लोक स्वास्थ्य कार्यक्रमों एवं सेवाओं का अनिवार्य हिस्सा बनाया जायेजिससे कि सेवा प्रदान में उतरदायित्व एवं पारदर्शिता बढे। शिकायत निवारण की प्रक्रियाओं को सुचारु रुप से चलाने के लिए संस्थागत व्यवस्थायें बनाई जायें जिसके लिए पर्याप्त धन राशि के साथ साथ आवश्यक प्रबंधन स्वायतता भी प्राप्त हो।
12- लोक स्वास्थ्य प्रणाली को भ्र्ष्टाचार मुक्त किया जायेः नियुक्ति, पदोन्नति, स्थानान्तरण, खरीदी तथा अधोरचना विकास के लिए पारदर्शी नीतियां बनाई जायें तथा लागू की जाएं जिस प्रकार तामिलनाडू राज्य ने खरीदी के लिए तािा कर्नाटक राज्य ने स्थानान्तरण के लिए नीतियां बनाइ्र हैं। शिकायत निवारण की प्रक्रियाओं को सुचारु रुप से चलाने के लिए संस्थागत व्यवस्थायें बनाई जायें जिसके लिए प्रयाप्त धनराशि के साथ साथ आवश्यक स्वायत्तता प्राप्त भी हो।
13- निजी अस्पतालों द्वारा किये जाने वाले शोषण को समाप्त किया जायेः राष्ट्रीय क्लिनिकल एस्टेब्लिष्मैंट एक्ट के अंर्तगत मरीजों के अधिकार हर संस्थाओं में सुरक्षित हों विभिन्न सेवाओं के दाम नियंत्रित हों। प्रिस्क्रिप्षन, जांच तथा रेफरल के पीछे चलने वाली घूसखोरी को बंद किया जाए, एवं इसके लिए शासन द्वारा पर्यवेक्षित लेकिन स्वतंत्र शिकायत निवारण व्यवस्था लागू की जाये। मानक निर्माण का प्रकार ऐसा हो जिसमें कारपोरेट हित का बढ़ावा हो सके। इन तमाम व्यवस्थाओं पर यह भी विशेष ध्यान हो कि नैतिक एवं गैर वाणिज्यिक सेवा प्रदान करने वाले निजी प्रदाताओं को संम्पूर्ण परि रक्षा मिल रहा है।
14- समस्त सार्वजनिक बीमा योजनाओं को समय सीमा के अंतर्गत लोक सेवा व्यवस्था में विलीन किया जायेः आर एस बी वाई जैसे तथा अन्य राज्य संचालित बीमाएं कर-आधारित सार्वजनिक वितीय व्यव्स्था से पोषित लोक स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था में समय सीमा के अंर्तगत विलीन हो इन बीमा योजनाओं के अंर्तगत प्राप्त सभी सेवायें लोक स्वास्थ्य प्रणाली में भी सम्मिलित हों एवं इसके लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों। संगठित एवं असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को लोक स्वास्थ्य प्रणाली में पूर्ण रुप से शामिल किया जाये जिससे कि उनके लिए समेकित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध हो।
हरयाणा मुख्यमंत्री मुफ्त इलाजयोजना, जननी सुरक्षा योजना आदि सभी स्वास्थ्य योजनाओं को ठीक प्रकार से लागू किया जाए। इसके लिए जिला स्तर पर सामाजिक संस्थाओं जन संगठनों के कार्यकर्ताओं की एक माॅनिटरिंग कमेटी बनाई जाए जिसकी सिफारिशों पर सम्बंधित विभाग उचित कार्यवाही तुरन्त करे। हरयाणा से गुजरने वाले हाइवे पर एक्सीडैंट होने पर 48 घण्टे तक सभी को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं देने की योजना उचित ढंग से लागू की जाए।
15- स्वास्थ्य नीतियों के विकास में तथा प्राथमिकतायें तय करने में बहुपक्षीय अंर्तराष्ट्रीय वितीय संस्थाओं का तकनीकी सहयोग पूर्ण रुप से समाप्त होः विश्व बैंक , यू.एस.एड., गेट्स फाउन्डेशन , कंसलटेंसी संस्थाएं जैसे डियोलाइट,मैकेन्सी आदि का राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकतांए एवं वितीय या सेवा प्रदाय रणनीतियों के निर्धारण में भूमिका को पूर्ण रुप से समाप्त किया जाये। शोध ज्ञान संसाधन का विकास एवं वितरण के लिए एक विषेश अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्रणाली गठित किया जाये , खासकर अन्य विकासशील देशों के साथ। डब्लू.एच. . ,यूनिसेफ तथा अन्य संयुक्त राष्ट्रीय संस्थाओं के उपर तकनीकी निर्भरता एवं उनकी वितिय सहायता की आवश्यकता से मुक्त किया जाने हेतू शासकीय स्तर पर दबाव बनें। इस प्रकार की संस्थाओं
की ओर से आने वाले परामर्श तथा विशेषज्ञता को भी समीक्षात्मक दृष्टि से देखा जाये क्योंकि यह संस्थाएं भी कारपोरेट एवं निजी संस्थानों के हित से प्रभावित हैं
16 - राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर स्वास्थ्य पर शोध एवं विकास के लिए क्षमता निर्माण होः लोक स्वास्थ्य बजट का कम से कम 5% स्वास्थ्य पर शोध के लिए आवंटित हो जिसमें स्वास्थ्य तन्त्रों पर शोध भी शामिल हो। सवास्थ्य के क्षेत्र में तथा स्वास्थ्य तन्त्रों पर शोध हेतू नवीन संस्थागत ढांचे शासन द्वारा गठित हो तथा मौजूदा संस्थाओं को पर्याप्त शासकीय वितिय सहायता दिया जाये।
17- आवश्यक एवं सुरक्षित दवाईयों तथा उपकरणों की सही उपलब्धता सुनिष्चित होः सभी दवाईयों का मूल्य आधारित दाम नियन्त्रण हो , दवा एवं उपकरण सुरक्षा के लिए आवश्यक प्रावधान हो। जेनेरिक दवाईयों के वितरण के लिए पर्याप्त संविधायें प्रणाली हों चिकित्सकों द्वारा जेनेरिक दवाईयों के प्रिस्क्रिप्षन हेतू अनिवार्यता हो। इंडियन पेटैंट एक्ट के अंर्तगत लोक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए की गई व्यवस्थाओं का दवाईयों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए उपयोग हो तथा ज्यादातर दवाईयों एवं उपकरणों के देषी निर्माण को बढावा मिले।
18- जैव चिकिस्तकीय शोध तथा क्लिनिकल ट्रायलों की सशक्त विनियामक व्यवस्था होः क्लिनिकल ट्रायलों के नैतिक संचालन हेतू स्पष्ट रुप रेखा तैयार एवं लागू हो जिससे समस्त हितग्राहियों के सशक्त विनमय के लिए व्यवस्थायें बंधित हो चाहे वे वितीय प्रदाता हो , शोध संस्थाएं हों या नैतिक समितियां हों। सी.डी.एस.सी.. तथा आई.सी. एम. आर. द्वारा समस्त क्लिनिकल ट्रायलों का तथा ट्रायल स्थानों की सशक्त निगरानी की जाये तथा ट्रायल संसाधनों के आंवटन के दौरान वहां पर आवश्यक सभी आपातकालीन स्थिति के निपटारे हेतू व्यवस्थायें सुनिश्चित हों क्लिनिकल ट्रायलों में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को प्र्याप्त क्षतिपूर्ण राशि उपलब्ध कराने हेतू एवं उनको हो सकने वाले समस्त बुरे प्रभाव निपटारे के लिए पर्याप्त व्यवस्था के साथ निर्देश विकसित और लागू हों। क्लिनिकल ट्रायल प्रतिभागियों के लिए उनके अधिकार पत्र विकसित किया जाय जिसकी कानूनी रुप में भी वैधता हो।
19- सभी मानसिक रुप से पीड़ित मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं एवं रक्षा सुनिश्चित की जायेंः जिला स्तरीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंर्तगत शामिल किया जाये। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य नीति पर अमल हो तथा मानसिक स्वास्थ्य कानून पास किया जाये।
20- कीटनाशक दवाओं के अन्धाधुन्ध इस्तेमाल के चलते हरियाणा के हर क्षेत्र, मानवीय, पशु खेती में इसके दुष्परिणाम सामने रहे हैं। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि मानवीय स्तर पर इन कीटनाशकों की मात्रा पता लगाने के टैस्टों की सुविधा इस प्रदेश के इकलौते पीजीआईएमएस में भी नहीं है। कई तरह की बीमारियां इसके चलते बढ़ रही हैं या पैदा हो रही हैं। यह सुविधा तत्काल मुहैया करवाई जाए।
21- सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर - एक सर्जन, एक फिजिसियन, एक शिशु रोग विशेषज्ञ एक महिला रोग विशेषज्ञ के प्रावधान के मानक केन्द्रीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा तय किये गए हैं। इसके साथ यदि मरीज बेहोशी का विशेषज्ञ नहीं है तो सर्जन और गायनकाॅलोजिस्ट तो अपंग हो जाते हैं। इसलिए इन पांचों विशेषज्ञों की नियुक्तियां प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों मे की जाए।
22. प्रदेश के जिलों में गुड़गांव, रोहतक, हिसार, भिवानी,फरीदाबाद और सोनीपत में विशेष आर्थिक पैकेज के तहत 1500 करोड़ रुपये की परियोजनांए शुरू की गइ्र हैं जिसके तहत स्वास्थ्य सेवाओं के आधारभूत ढांचे को विकसित करने के लिए इन जिलों के अस्पतालों को अपगे्रड करके सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल बनाये जा रहे हैं। बहुत ही हाईटेक उपकरण पिछले सालों में खरीदे गए जो बहुत कम जगह और कमतर स्तर पर इस्तेमाल किये जा रहे हैं। यहां पर उपयुक्त स्टाफ की कमी को पूरा करते हुए इसके लिए सम्बंधित विशेषज्ञों, डाॅक्टरों, नर्सों पैरामैडिकल स्टाफ को उपयुक्त ट्रेनिंग देने की भी आवश्यकता है। निशुल्क सर्जीकल पैकेज योजना के तहत 2009 से बी. पी. एल परिवारों को दी जा रही निशुल्क सर्जरी की सेवा को लागू करने में रही सभी दिक्कतों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाये जायें। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले अधिसूचित झोंपड़ पट्टियों एवं बस्तियों के निवासियों के सभी आपरेशन मुफत करने की योजना को सही ढंग से लागू किया जाए इंदिरा बाल स्वास्थ्य योजना 26 जनवरी 2010 से लागू की गई। जिसके तहत अठारह वर्ष तक की आयु के बचचों के स्वास्थ्य कार्ड बना कर सरकारी अस्पतालों में उनके स्वास्थ्य की निशुल्क जांच ईलाज किया जाता है। बहुत से लोगों को इन सब योजनाओं से वाकिफ ही नहीं लगते ओर इनके क्रियान्वयन की दिक्कतों को भी दुरुस्त करने के कदम पहले सुझाये गये माध्यमों के द्वारा उठाये जायें। प्रदेश में 2005 तक एम. बी.बी.एस.की कुल सीटें 350 थी जो वर्ष 2013 में 850 हो गई। मगर इन विद्यार्थियों की गुणवता पूर्ण मैडीकल शिक्षा के लिए जरुरी फैकल्टी की काफी कमी है हरेक मैडीकल कालेज में और इन्फ्रास्ट्रक्चर की बहुत कमी है जिसे पूरा करना बड़ी चुनौती है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत दाल रोटी योजना को सही सही लागू किया जाए।
23- कुपोषण ;नैशनल फैमिली हैल्थ सर्वे- 4  के अनुसार, हरियाणा में बढ़ा है। दूर करने के लिए कारगर कदम उठाये जायें। इसी प्रकार गर्भवती महिलाओं में नैशनल फैमिली हैल्थ सर्वे 4 के अनुसार नैषनल फैमिली हैल्थ सर्वे 3 के मुकाबले 10 प्रतिशत खून की कमी बढ़ी है। इसके साथ-साथ लड़कियों में किये गये सरकारी सर्वे में भी खून की कमी का प्रतिशत काफी पाया गया है। उचित कदम उठाये जाने की जरूरत है।
24-पी एन डी टी एक्ट के तहत उचित कार्यवाही की जाएं।
25- मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना सुचारू रूप से लागू की जाये |
26- जननी सुरक्षा योजना को भी ठीक ढंग से लागू करवाने  के लिए जन समुदाय को संगठित किया जाये |
27- प्रधानमंत्री जन औषधि योजना में 699 दवाओं की लिस्ट दी गयी है | सभी दवाएं जान औषधी केंद्र पर उपलब्ध नहीं हो रही |  उपलब्ध करवाया जाये |
और इस सुविधा का ब्लॉक स्तर तक विस्तार किया जाये |
28- जन संख्या के हिसाब से जन स्वास्थ्य रक्षा सेवाओं के पब्लिक ढांचे को मजबूत किया जाये |  |
29 अपने अपने मोहल्ले , गली, शहर गांव के स्तर पर जन स्वास्थ्य सेवाओं की जनता के सहयोग से उपलब्धता करवाने के लिए संघर्ष की जरूरत होंगी|
स्वास्थ्य का मुद्दा सामाजिक और आर्थिक तो है ही साथ ही यह राजनैतिक मुद्दा भी है |  इसलिए जन स्वास्थ्य सेवाओं को कारपोरेट सैक्टर के  हाथों में दिए जाने का विरोध भी जन स्वास्थ्य अभियान का हिस्सा है |
जन स्वास्थय अभियान हरियाणा जनता से, जनता के वंचित तबकों से  और इसके जन संगठनों से अपील करता है कि मजबूत संगठन बना कर  स्वास्थय हमारा हक़ है "के मुद्दे पर संघर्ष में हिस्सेदारी करें |
डॉ रणबीर सिंह दहिया
सदस्य
कोर ग्रुप , जन स्वास्थ्य अभियान
हरियाणा

Saturday, 20 April 2019

आशा वर्कर्स



राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के प्रमुख घटकों में से एक देश में प्रत्येक गाँव को प्रशिक्षित महिला सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता आशा या मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्रदान करना है। गांव से ही चयनित और इसके लिए जवाबदेह, आशा को समुदाय और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के बीच एक इंटरफेस के रूप में काम करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
आशा के प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं:
*आशा को मुख्य रूप से 25 से 45 वर्ष की आयु में विवाहित / विधवा / तलाकशुदा गाँव की महिला होना चाहिए, जो औपचारिक रूप से आठवीं कक्षा तक की शिक्षा प्राप्त करने वाली महिला होनी चाहिए। 
*यह तभी शिथिल हो सकता है जब इस योग्यता वाला कोई उपयुक्त व्यक्ति उपलब्ध न हो। *विभिन्न सामुदायिक समूहों को शामिल करते हुए चयन की एक कठोर प्रक्रिया के माध्यम से आशा को चुना जाएगा। *आशा को अपने काम में सफल होने के लिए आवश्यक ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षण एपिसोड की श्रृंखला से गुजरना होगा। *आशाएँ प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन प्राप्त करेंगी। ज्ञान से प्रशिक्षित और एक दवा-किट के साथ-साथ पहली संपर्क स्वास्थ्य सेवा देने के लिए, प्रत्येक आशा को अपने गाँव में सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सामुदायिक भागीदारी का एक फव्वारा बनने की उम्मीद है। *जनसंख्या के वंचित वर्गों के किसी भी स्वास्थ्य संबंधी मांगों के लिए कॉल का पहला बंदरगाह हो।
 आशा समुदाय में एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता होगी जो स्वास्थ्य और उसके सामाजिक निर्धारकों पर जागरूकता पैदा करेगी और समुदाय को स्थानीय स्वास्थ्य योजना और मौजूदा स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती उपयोगिता और जवाबदेही के लिए जुटाएगी। वह अच्छी स्वास्थ्य प्रथाओं का प्रवर्तक होगा और समय पर काम करेगा। रेफरल। वह जन्म की तैयारी, सुरक्षित प्रसव के महत्व, स्तनपान और पूरक आहार, टीकाकरण, गर्भनिरोधक और प्रजनन संक्रमण संक्रमण / यौन संचारित संक्रमण (RTI / STIs) और सामान्य बच्चे की देखभाल सहित आम संक्रमणों की रोकथाम पर महिलाओं की सलाह लेंगे। आशा समुदाय को जुटाएगी और उन्हें आंगनवाड़ी / उप-केंद्र / प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध स्वास्थ्य और स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं तक पहुँचने में सुविधा प्रदान करेगी। वह मौखिक निवास थेरेपी (ओआरएस) जैसी सभी बस्तियों के लिए उपलब्ध कराए जा रहे आवश्यक प्रावधानों के लिए डिपो होल्डर के रूप में कार्य करेगी। )
ओरल रिहाइड्रेशन थेरेपी (ओआरएस), आयरन फोलिक एसिड टैबलेट (आईएफए), क्लोरोक्वीन, ** डिस्पोजेबल डिलीवरी किट (डीडीके), ओरल पिल्स एंड कंडोम, इत्यादि जैसे सभी बस्तियों के लिए आवश्यक प्रावधान उपलब्ध कराए जा सकते हैं। । स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत की महिला स्वास्थ्य और स्वच्छता समिति, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, और आशा के प्रशिक्षक जैसे महिला समितियां आशा को समर्थन का एक प्रमुख स्रोत होंगी।
 आशा: हरियाणा परिदृश्य

16506 ASHAs (लक्षित 18008 में से) अगस्त, 2013 तक चयनित और तैनात की गई।
सभी आशाओं के लिए प्रेरना प्रशिक्षण पूरा।
बैंक खाते वाली सभी आशाएँ।
12000 आशाओं को यूनिफ़ॉर्म (कोट) प्राप्त हुआ।
11833 आशाओं को ड्रग किट।
निश्चय किट के साथ प्रदान की जा रही आशाएँ।
PHCs पर मासिक बैठकों में भाग लेती हैं ASHAs।
उपलब्ध फंड से सीधे उनके बैंक खातों में प्रोत्साहन भुगतान।
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली आशाओं को जिला स्तर पर चुना जाता है और तिमाही पुरस्कार समारोह में सम्मानित किया जाता है।

Monday, 4 February 2019

PAY SCALE OF DOCTORS

The 2017 rural health statistics report shows that there is a crippling shortage of specialists in the health care system. Of the total 22,496 sanctioned posts of surgeons, pediatricians, physicians and obstetricians/gynecologists, 18,347 were vacant. Of 5,624 pediatrician posts, 4,554 were vacant. There were 4,760 vacancies for physician posts, 4,170 unfilled posts for obstetricians/gynecologists and 4,866 for surgeons. For each kind of specialist, the total number of sanctioned posts in the country is the same. Many CHCs have never seen a specialist being posted there ever since the National Rural Health Mission was launched.
The Health Ministry explains that “these salaries were approved under the National Health Mission (NHM) because that was the only option we had to get specialists in rural areas. Without specialists, it is not possible for NHM to function at capacity. It is understandable that when these doctors get paid much more in the private sector, we will not get good people unless we give competitive salaries. That is why some states even asked doctors to quote their own salaries”. Interestingly, despite the salaries, lack of facilities, lack of good schools and uncertainty about the quality of life make doctors reluctant to go to these postings. Sant Lal Verma, civil surgeon, from Mewat, stated that “We were trying to hire a couple, one of them a gynecologist and the other a pediatrician. We thought hiring the two together would make the decision easier for them. We were paying the gynecologist Rs 2.5 lakh and the pediatrician Rs 2- 2.5 lakh. Earlier, these people were paid anything between Rs 80,000-Rs 1 lakh.” Source: The Indian Express

Simply posting a specialist doctor does not solve this problem. First develop the infrastructure, ensure safety of the medical personnel, develop referral chain and only then this measure will be effective. Otherwise this doctor will be made a scapegoat and become a victim of both administrative and public wrath. To me it appears a shortcut , temporary remedy without going into the root of the problem.

infra structure should be developed in each and every government hospital,good living conditions should be provided to working doctors,good protection should be given,good education facilities are needed for the childeren of working doctors at least with in 10 t0 15km range,regular payment of salaries, government vehicle to move to near by places if good living facilities are not present at the working site,mult ispeciality team should be available when ever needed in near by places,no bond system,8 hours duty,holidays as per medical colleges or city government general hospitals,no political persons involvement in working area hospital ,if these are avilable many young doctors will join.

JSA AGENDA


Suggestion for Agenda of JSA Meeting 23-25 February
23 February
9:30 am.

Condolence on demise of Amit Sengupta

9:40
Review of last NCC meeting at Raipur
To discuss tasks decided
10:00
Follow up of NHA 3
Discussion on recommendations of Plenaries and Sub-plenaries.
11:00
State Reporting
States will be given 5 minutes to report activites undergone after NHA3
12:30
PHA4:
PHA Declaration; Thematic papers; Health Manifesto; sharing tasks decided.
13:15 to 14:15
Break

14:15
JSA Manifesto
Further actions, campaign
15:00
Reporting of PHM Steering Committee meeting
Held at Dhaka and Thailand
15:30 to 15:50
Break

15:40
Patients’ Right


24 February
9:30
Discussion on Organisation
a) Streamlining and a minimum structure building.
b) Sharing of Responsibilities
c) Membership: state, organizations; individuals
d) Communication process
e) Representation in different sectors
11:30
Co-ordiantion with Stearing Committee & sharing of tasks

12:00
Building of Resources
Funds
12:30
Creating centre for regular functioning

13:00 to 14:00
Break

14:00-17:00
Including tea break
Future actions
a) Action on thematic papers of PHM
d) Identification of Campaign programme
b) Planning of Campaign materials
c) Planning IPHU, India
d) Co-ordination/support to States
e) Attending state meetings
f) Planning of national programme (Rally, national convention)



AYUSHMAN BHARAT

  • PM-JAY के दायरे में ग्रामीण इलाके के 8.03 करोड़ परिवार आयेंगे.
  • शहरी इलाके के 2.33 करोड़ परिवार आयुष्मान भारत योजना (ABY) के दायरे में आयेंगे.
  • SECC के आंकड़ों के हिसाब से आयुष्मान भारत योजना (ABY) में लोगों को मेडिकल इंश्योरेंस मिलेगा.
  • मोदी सरकार आयुष्मान भारत योजना (ABY) शुरू कर चुकी है. ABY को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) भी कहा जाता है. यह वास्तव में हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम है. PM-JAY के तहत देश के 10 करोड़ परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा मिल रहा है. 

    क्या है आयुष्मान भारत योजना (ABY) का लक्ष्य?प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'प्रधानमंत्री जन आरोग्य' योजना (आयुष्मान भारत योजना यानी ABY) की घोषणा की है. इसे पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयंती पर 25 सितंबर से देशभर में लागू कर .. 
    आयुष्मान भारत योजना (ABY) में हर परिवार को सालाना पांच लाख रुपये का मेडिकल इंश्योरेंस मिल रहा है. साल 2008 में यूपीए सरकार द्वारा लांच राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना को आयुष्मान भारत योजना (PM-JAY) में मिला दिया गया है.
  • ABY में किसे मिल रहा है कवरेज?मोदी सरकार की कोशिश यह है कि महिला, बच्चे और सीनियर सिटीजन को ABY में खास तौर पर शामिल किया जाय. आयुष्मान भारत योजना (ABY) में शामिल होने के लिए परिवार के आकार और उम्र का कोई बंधन नहीं है. 

    सरकारी अस्पताल और पैनल में शामिल अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना (ABY) के लाभार्थियों का कैशलेस/पेपरलेस इलाज हो सकेगा. 

    ABY की योग्यता का निर्धारण कैसे होता है?SECC के आंकड़ों के हिसाब से आयुष्मान भारत योजना (ABY) में लोग .. 
    शहरी इलाके में 11 पूर्व निर्धारित पेशे/कामकाज के हिसाब से लोग आयुष्मान भारत योजना (ABY) में शामिल हो सकते हैं. राज्यों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में पहले से शामिल लोग खुद ही आयुष्मान भारत योजना (ABY) में शामिल हो गए हैं.

  • ग्रामीण इलाके के लिए ABY की योग्यता आयुष्मान भारत योजना (ABY) में शामिल होने के लिए मोटे तौर पर ये योग्यता हैं: 

    • ग्रामीण इलाके में कच्चा मकान, परिवार में किसी व्यस्क (16-59 साल) का नहीं होना, परिवार की मुखिया महिला हो, परिवार में कोई दिव्यांग हो, अनुसूचित जाति/जनजाति से हों और भूमिहीन व्यक्ति/दिहाड़ी मजदूर
    • इसके अलावा ग्रामीण इलाके के बेघर व्यक्ति, निराश्रित, दान या भीख मांगने वाले, आदिवासी और क़ानूनी रूप से मुक्त बंधुआ आदि खुद आयुष्मान भारत योजना  .. 

      ABY में अस्पताल में भर्ती की प्रक्रिया आयुष्मान भारत योजना (ABY) का लाभार्थी अस्पताल में एडमिट होने के लिए कोई चार्ज नहीं चुकाएगा. अस्पताल में दाखिल होने से लेकर इलाज तक का सारा खर्च इस योजना में कवर किया जायेगा. आयुष्मान भारत योजना (ABY) के लाभ में अस्पताल में दाखिल होने से पहले और बाद के खर्च भी कवर किये जायेंगे. पैनल में शामिल हर अस्पताल में एक आयुष्मान मित्र होगा. वह मरीज की मदद करेगा और उसे अस्पताल की सुविधाएं दिलाने में मदद करेगा. अस्पताल में एक हेल्प डेस्क भी होगा जो दस्तावेज चेक करने, स्कीम में नामांकन के लिए वेरिफिकेशन में मदद करेगा. आयुष्मान भारत योजना में शामिल व्यक्ति देश के किसी भी सरकारी/पैनल में शामिल निजी अस्पताल में इलाज करा सकेगा.

  • क्या-क्या हैं ABY में शामिल? आयुष्मान भारत योजना (ABY) में तकरीबन हर बीमारी के लिए चिकित्सा और अस्पताल में दाखिल होने का खर्च कवर है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने आयुष्मान भारत योजना (ABY) में 1354 पैकेज शामिल किये हैं. इसमें कोरोनरी बायपास, घुटना बदलना और स्टंट डालने जैसे इलाज शामिल हैं. 

    आयुष्मान भारत योजना (ABY) में इलाज का खर्च केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना (CGHS) से 15-20 फीसदी कम है. 

    इसे भी पढ़ें: आधार के बगैर नहीं मिलेगा आयुष्मान भारत स्कीम (ABY) का लाभ < .. 
    इसे भी पढ़ें: आयुष्मान भारत योजना के बारे में यहां जानें सब कुछ 

    किस अस्पताल में होगा ABY के लाभार्थी का इलाज? 
    सभी सरकारी अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना (ABY) के लाभार्थी इलाज करा सकते हैं. इसके साथ ही सरकार के पैनल में शमिल निजी अस्पताल में भी ABY के लाभार्थी इलाज करा सकते हैं. 

    पैनल में शामिल होने के लिए निजी अस्पताल में कम से कम 10 बेड और इसे बढ़ाने की क्षमता होनी चाहिए. 

    लाभार्थी सरकार द्वारा ABY के लिए जारी हेल्पलाइन नंबर पर भी कॉल कर सकते हैं:  .. 

    14555
  • आयुष्मान भारत योजना (ABY) में कौन सी बीमारियां हो रही हैं कवर?

    आयुष्मान भारत योजना (ABY) या PM-JAY के तहत देश के 10 करोड़ गरीब परिवार के करीब 50 करोड़ लोगों को 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य सुरक्षा कवर दिया जा रहा है 

  • मोदीकेयर के नाम से मशहूर आयुष्मान भारत योजना (ABY) 25 सितंबर से शुरू हो चुकी है. केंद्र सरकार इस योजना के तहत देश के 10 करोड़ परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध करा रही है. 

    ABY को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) भी कहा जाता है. यह वास्तव में हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम है. 

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'प्रधानमंत्री जन आरोग्य' (PM-JAY) योजना की घोषणा की है. इसे पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयंती पर 25 सितंबर से देशभर में लागू कर दिया गया है. 

    अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा शुरू किये गए स्वास्थ्य सुरक्षा योजना ओबामाकेयर की तर्ज पर देश की (ABY) को मोदीकेयर भी कहा जाता है. 

    आयुष्मान भारत योजना (ABY) के तहत देश के 10 करोड़ गरीब परिवार के करीब 50 करोड़ लोगों को 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य सुरक्षा कवर दिया जा रहा है. 
  • कौन-कौन सी बीमारियां होंगी ABY में शामिल? 
    कौन-कौन सी बीमारियां होंगी ABY में शामिल? 
    • आयुष्मान भारत योजना (ABY) में प्रति परिवार हर साल 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा मिल रहा है.
    • मोदीकेयर (PM-JAY) में पुरानी बीमारियों को भी कवर की जाती हैं.
    • किसी बीमारी की स्थिति में अस्पताल में एडमिट होने से पहले और बाद के खर्च भी कवर किये जा रहे हैं. PM-JAYमें ट्रांसपोर्ट पर होने वाला खर्च भी शामिल है.
    • किसी बीमारी की स्थिति में सभी मेडिकल जांच/ऑपरेशन/इलाज आदि PM-JAYके तहत कवर होते हैं.
    •  ..
    कौन ले सकता है आयुष्मान भारत योजना (ABY) का लाभ? 
    • देश के 10.74 करोड़ परिवार PM-JAYका लाभ ले सकते हैं.
    • इन परिवार की पहचान गरीब और सुविधाओं से वंचित लोगों के तौर पर हुई है.
    • आयुष्मान भारत योजना (ABY) का लाभ लेने के लिए सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल हुआ है.
    • PM-JAY का लाभ लेने के लिए परिवार के आकार या उम्र की कोई सीमा तय नहीं की गई है.

    आयुष्मान भारत योजना (ABY) का लाभ कैसे लें? स्वास्थ्य बीमा के पैनल में शामिल किसी भी अस्पताल से बिना पैसे दिए (कैशलेस) इलाज हो रहा है. योजना के तहत कसौटी पर खरे उतरने वाले निजी अस्पताल ऑनलाइन पैनल में रखे गए हैं. के तहत देश के किसी भी अस्पताल में इलाज कराया जा सकता है. आयुष्मान भारत योजना (ABY) के लिए नीति आयोग कैशलेस या पेपरलेस इलाज के लिए आईटी फ्रेमवर्क विकसित कर चुका है.
  • आयुष्मान भारत योजना (ABY) पर कैसे होगा अमल? राष्ट्रीय स्तर पर आयुष्मान भारत योजना (ABY) को राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा मिशन देख रही है. राज्य स्तर पर PM-JAYकी जिम्मेदारी प्रदेश सुरक्षा एजेंसी के पास है.
  • ABY पर खर्च होने वाली रकम कहां से आएगी? 
    • आयुष्मान भारत योजना (ABY) पर आने वाली लागत राज्य और केंद्र सरकार आपस में बांटे रही हैं.
    • ABY में राज्य की हिस्सेदारी जरूरी है.
    • राज्य की स्वास्थ्य एजेंसी को केंद्र सरकार एसक्रो अकाउंट से सीधे पैसे भेज रही है.
    • ABY की अनुमानित लागत 12 हजार करोड़ रुपये है.

    ABY से क्या होगा फायदा? देश में वंचित तबके के लोगों के लिए PM-JAY बहुत उपयोगी कदम साबित हो सकता है. सरकार का मानना है कि पांच लाख रुपये तक की हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम से देश की बड़ी आबादी की स्वास्थ्य समस्या दूर करने में मदद मिल सकती है.